1 Part
218 times read
2 Liked
ये मंजिल सूरज की किरणों के साथ निकलता हूं हर रोज ढलते शाम के साथ लौटता हूं हर रोज। कभी कभी बादलों में ये सूरज और मुश्किलों में दब जाता हूं ...